राजपत्रिका : करोड़ों की अवैध लकड़ी जब्ती से हड़कंप, ‘पुष्पा स्टाइल’ तस्करी की चर्चा ने बढ़ाई सनसनी, अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका

जांजगीर-चांपा : जिले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। बंद पड़ी एक राइस मिल परिसर से भारी मात्रा में अवैध इमारती लकड़ियां बरामद होने के बाद यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया है। प्रारंभिक जांच में लकड़ियों की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कोई छोटा-मोटा अवैध कारोबार नहीं बल्कि संगठित तस्करी गिरोह का हिस्सा हो सकता है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब्त लकड़ियों की मात्रा और उनकी कटिंग की शैली से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि यह गतिविधि लंबे समय से संचालित हो रही थी और इसमें कई स्तरों पर लोगों की संलिप्तता हो सकती है। विभागीय टीम लगातार दस्तावेजों, वाहनों और संभावित किरायेदारों की जानकारी खंगाल रही है। इस पूरी कार्रवाई ने प्रशासनिक सतर्कता, स्थानीय निगरानी व्यवस्था और अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या जिले में किसी बड़े गिरोह का सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा था, जो अब जाकर उजागर हुआ है।
बंद राइस मिल से निकला अवैध लकड़ियों का बड़ा जखीरा

वन विभाग की टीम को सूचना मिलने के बाद ग्राम अकलतरी से लगे ग्राम भादा स्थित एक बंद पड़ी राइस मिल में छापेमारी की गई, जहां अंदर बड़े पैमाने पर लकड़ियों का भंडारण मिला। यह परिसर पिछले कुछ वर्षों से निष्क्रिय बताया जा रहा था, जिससे तस्करों को इसे छिपे गोदाम के रूप में इस्तेमाल करने का अवसर मिल गया।
जांच के दौरान लकड़ियों को व्यवस्थित ढंग से रखा गया पाया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह आकस्मिक भंडारण नहीं बल्कि योजनाबद्ध गतिविधि थी। अधिकारियों ने मौके पर लकड़ी के गट्ठों, कटे टुकड़ों और छिपाकर रखे हिस्सों को जब्त किया। मिल के स्वामित्व और किरायेदारी की जानकारी जुटाई जा रही है, क्योंकि यह पहलू पूरे मामले की जड़ तक पहुंचने में अहम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार परिसर में लंबे समय से हलचल देखी जाती थी, परंतु किसी ने औपचारिक शिकायत नहीं की, जिससे यह कारोबार परदे के पीछे चलता रहा।
15 से 20 ट्रक लकड़ी होने का अनुमान, दो वाहन भी जब्त
वन विभाग की प्रारंभिक गणना के अनुसार जब्त लकड़ियों की मात्रा लगभग 15 से 20 ट्रक के बराबर हो सकती है, जो इस पूरे नेटवर्क की विशालता को दर्शाती है। मौके से दो वाहन भी बरामद किए गए हैं, जिनमें एक स्थानीय पासिंग का और दूसरा मध्यप्रदेश पासिंग का बताया जा रहा है। दूसरे वाहन के दस्तावेजों की जांच में जबलपुर क्षेत्र से संबंध की जानकारी सामने आई है, जिससे अंतरराज्यीय तस्करी की आशंका और गहरी हो गई है।
विभाग ने वाहनों के मालिकों और ड्राइवरों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लकड़ियों की पैकिंग और ढुलाई की व्यवस्था से यह संकेत मिलता है कि तस्करों के पास मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क था। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी बिना संगठित परिवहन व्यवस्था के संभव नहीं, इसलिए इस मामले में कई कड़ियों का खुलासा होना बाकी है।
तेंदू-सार और खैर लकड़ी की बरामदगी ने बढ़ाई गंभीरता
बरामद लकड़ियों में तेंदू-सार और खैर प्रमुख रूप से शामिल हैं, जो बाजार में ऊंची कीमत पर बिकती हैं। खैर लकड़ी का उपयोग कथा निर्माण में किया जाता है, जबकि तेंदू-सार की लकड़ी की उपयोगिता विशेष औद्योगिक और हथियार संबंधी हिस्सों में भी मानी जाती है। अधिकारियों ने इस पहलू को बेहद संवेदनशील बताया है क्योंकि इससे अवैध उपयोग की संभावनाएं भी जुड़ जाती हैं।
मौके पर पाई गई लकड़ियों को बड़े गट्ठों से काटकर छोटे-छोटे आकार में अत्यंत सफाई से तैयार किया गया था, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि इसमें कुशल कारीगर और संगठित गिरोह शामिल हो सकता है। वन विभाग ने लकड़ी की गुणवत्ता, वजन और बाजार मूल्य का विस्तृत मूल्यांकन शुरू कर दिया है ताकि वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन किया जा सके और आगे की कानूनी कार्रवाई को मजबूत आधार मिल सके।
‘पुष्पा स्टाइल’ तस्करी की चर्चा और जांच की दिशा
घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में इसे फिल्मी अंदाज से जोड़कर चर्चाएं तेज हो गई हैं और लोग इसे ‘पुष्पा स्टाइल’ तस्करी कहकर संबोधित कर रहे हैं। हालांकि वन विभाग का कहना है कि यह केवल जनचर्चा है, वास्तविकता का पता विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा। विभागीय अधिकारी हिमांशु डोंगरे ने स्पष्ट किया है कि पूरे नेटवर्क की परत दर परत जांच की जा रही है और जो भी मुख्य सरगना या सहयोगी होंगे, उन्हें चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच टीम अब दस्तावेजों, कॉल डिटेल, परिवहन रूट और वित्तीय लेनदेन के पहलुओं को भी खंगाल रही है। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई आगे और बड़े खुलासों का रास्ता खोल सकती है। फिलहाल यह मामला जिले भर में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई इस बात की प्रतीक्षा कर रहा है कि जांच के बाद आखिर इस अवैध नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग सामने आते हैं।



